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कुकड़ेश्वर में निजी स्कूलों की मनमानी चरम पर, महंगे प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें खरीदने को मजबूर हो रहे पालक,
भंवरलाल मांडीवाल
कुकड़ेश्वर :- देश में प्राइवेट पब्लिकेशन की महंगी बुक बंद होने व एक जैसा पाठ्यक्रम संचालित करने को लेकर मुख्यमंत्री से लेकर सभी संगठन सभी प्रदेश में अभियान चलाया जा रहा है परंतु कालाबाजारी पर रोक नहीं लग रही है,नगर कुकडेश्वर में भी 8, से 10 स्कूल इंग्लिश मीडियम के नाम से संचालित होते हैं परंतु इन स्कूलों में प्राइवेट पब्लिकेशन कि बुक्स संचालित कर पालकों व आम जनता इस महंगाई के दौर में चौतरफा मार पड़ रही है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही नगर और क्षेत्र के निजी स्कूलों (प्राइवेट स्कूलों) की मनमानी एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। शासन और शिक्षा विभाग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद निजी स्कूल संचालक पालकों को, नर्सरी से आठवीं तक की किताबें 2हजार से 3 हजार के बीच महंगे दामों पर प्राइवेट पब्लिकेशन की पुस्तकें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
“कमीशन का खेल”
नियमों के मुताबिक, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त इन निजी स्कूलों को बोर्ड द्वारा निर्धारित और स्वीकृत पुस्तकें (जैसे NCERT या राज्य बोर्ड की किताबें) ही चलानी चाहिए। ये पुस्तकें न केवल गुणवत्तापूर्ण होती हैं, बल्कि बेहद किफायती भी होती हैं। लेकिन इसके विपरीत, कुकड़ेश्वर और आसपास के स्कूल संचालक मोटी रकम कमाने और भारी-भरकम कमीशन के चक्कर में जानबूझकर निजी प्रकाशकों (प्राइवेट पब्लिकेशन) की महंगी किताबें लागू कर रहे हैं। एवं कक्षा पांचवी, आठवीं में एमपी बोर्ड के कोर्स के अलावा अन्य बुक्स भी कोर्स के साथ खरीदने को मजबूर कर रहे हैं, सुत्रों की मानें तो इन किताबों पर 50 से 60% कमीशन स्कूल संचालकको को मिलता है, जिसकी पूरी वसूली पालकों की जेब से की जाती है।
“महंगाई के दौर में पालकों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव”
सत्र की शुरुआत में ही कॉपियां, यूनिफॉर्म, री-एडमिशन फीस और स्कूल वैन के खर्च से परेशान पालकों के लिए ये प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें ‘कोढ़ में खाज’ साबित हो रही हैं। जो कोर्स महज कुछ सौ रुपयों में उपलब्ध हो सकता है, उसके लिए पालकों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। मध्यम और कामकाजी वर्ग के पालक घीसालाल, मांगीलाल, हीरालाल, गोपालसिंह,कन्हैया लाल,राधेश्याम रावत, बद्रीलाल, घनश्याम,विनोद पीयूष, अमरलाल,भेरूलाल रावत आदि का कहना है कि इस महंगाई के दौर में बच्चों को पढ़ाना अब उनके बजट से बाहर होता जा रहा है, और यह महंगी किताबें नगर की कुछ नामी दो-तीन दुकानों पर ही स्कूल संचालक उपलब्ध करवाते हैं बच्चों के भविष्य को देखते हुए वे मजबूरी में यह अतिरिक्त खर्च वहन कर रहे हैं। और पालक इसकी शिकायत भी नहीं कर सकते क्योंकि बाद में बच्चों व पालकों को स्कूल द्वारा पिस अन्य वजह से परेशान व टॉर्चर किया जाता है,
“जिम्मेदारों की ‘रहस्यमयी”‘
चुप्पी पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात प्रशासनिक अधिकारियों का ढुलमुल रवैया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), क्षेत्रीय अनुविभागीय अधिकारी (SDM) और जिला कलेक्टर जैसे जिम्मेदार उच्चाधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं। हर साल सत्र की शुरुआत में कागजी तौर पर सख्त कार्रवाई के निर्देश तो जारी होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। अधिकारियों की इस मौन सहमति को लेकर अब आम जनता में भारी आक्रोश है और लोग प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा रहे हैं।
“पालकों की मांग”
क्षेत्र के पीड़ित पालकों ने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि कुकड़ेश्वर के निजी स्कूलों की इस तानाशाही पर तुरंत लगाम लगाई जाए। स्कूलों के बुक कैटलॉग की जांच हो और नियम विरुद्ध प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें चलाने वाले शिक्षण संस्थानों की मान्यता रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को इस आर्थिक शोषण से राहत मिल सके।
“जिम्मेदार अधिकारियों का कहना”
(1)नगर के प्राइवेट स्कूल की मनमानी को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी से चर्चा करें तो उन्होंने कहा कि अधिकारियों को निर्देश देकर जांच करवाई जाएगी,
(ऐश्वर्या मुंदड़ा जिला शिक्षा अधिकारी नीमच)
(2)नगर में स्कूल द्वारा महंगी किताबें और उनकी फीस की मनमानी को लेकर एसडीएम से चर्चा करी तो उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारी को निर्देशित कर जांच करवाती हूं
(किरण आंजना एसडीएम मनासा)
(3) नगर में प्राइवेट स्कूल द्वारा महंगी किताबों को लेकर मनासा ब्लाक शिक्षा अधिकारी से चर्चा करी तो उन्होंने कहा कि इन सभी स्कूलों को एमपी बोर्ड की मान्यता है और वही पाठ्यक्रम चलना चाहिए परंतु यह अन्य पाठ्यक्रम चला रहे यह गलत है, जिला शिक्षा अधिकारी जो भी हमें आदेश देंगे हम कार्रवाई करेंगे, (राजेंद्र कुणेचा ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मनासा)
















