मनासा में पदस्थ हेड कांस्टेबल व महिला सहित चार ने की ठगी, भूखंड भी फर्जी निकला 2.45 करोड़ की ठग

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नीमच/ मनासा थाने में पदस्त हेट कास्टेबल के खिलाफ शहर के बोरानाडा थाना में एक कारोबारी से 2.45 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का प्रकरण सामने आया है। एक महिला ने पुलिसकर्मी की मिलीभगत से उच्च पदों पर नियुक्ति और जमानत दिलाने का झांसा देकर यह ठगी की। परिवादी पर्वतसिंह राजपुरोहित (40) ने रिपोर्ट में सुनीता विश्नोई, उसके पुत्र मनीष विश्नोई, विनोद विश्नोई और मनासा थाना, नीमच, में कार्यरत हेड कांस्टेबल राघवसिंह राजपूत के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराई है।

पर्वतसिंह ने बताया कि राघवसिंह से उसकी मित्रता थी। राघवसिंह ने फरवरी 2025 में उसे सुनीता से मिलवाया, जिसने स्वयं को राजनीतिक दलों के उच्च पदाधिकारियों और प्रशासन में पहुंच वाली बताया। सुनीता ने चित्तौड़गढ़ में पुलिस अधीक्षक और सांवलिया सेठ मंदिर के अध्यक्ष की मनचाही नियुक्ति दिलाने का प्रलोभन दिया। इसके लिए पर्वतसिंह ने सुनीता के पुत्रों मनीष और विनोद को 1.05 करोड़ रुपए नकद दिए। कुछ समय बाद राघवसिंह, ईश्वर पाटीदार, हेमंत पाटीदार और प्रकाश सिनम पर्वतसिंह की दुकान पर आए। उन्होंने बताया कि ईश्वर के रिश्तेदार अर्जुन पाटीदार का 65 किलोग्राम अफीम के एक मामले (थाना निंबाहेड़ा में एफआइआर संख्या 102/2025) में नाम आया है, जिसकी जमानत करवानी है। सुनीता ने उच्च न्यायालय से

पांच खाली चेक लिए

ईश्वर पाटीदार ने पर्वतसिंह से सुरक्षा के तौर पर पांच खाली चेक लिए, जिनमें से तीन (50 लाख, 60 लाख, 70 लाख) बैंक में लगाए जो बाउंस हो गए। सुनीता ने केवल 30 लाख रुपए लौटाए। शेष राशि मांगने पर सुनीता ने जोधपुर के पार्श्वनाथ सिटी में स्वयं का एक भूखंड (सी-45) 80 लाख रुपए में विशाल पाटीदार के नाम आम मुख्तारनामा कर दिया, जबकि भूखंड पर पहले से धोखाधड़ी का मुकदमा (थाना बोरानाडा में एफआईआर संख्या 369/2023) दर्ज था। पैसे वापस मांगने पर सुनीता ने पर्वतसिंह को जान से मारने की धमकी दी और खुद को ‘सुमता डॉन’ बताया। बोरानाडा थाना में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 316(2), 318(4), 308(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। उपनिरीक्षक चमनाराम को जांच सौंपी गई है।

जमानत दिलाने के लिए 1.50 करोड़ रुपए मांगे। ईश्वर पाटीदार ने पर्वतसिंह को 1.40 करोड़ रुपए दिए, जो उसने मनीष और विनोद को दिए। अर्जुन की जमानत नहीं हो सकी।

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