विमल शर्मा के नेतृत्व में संभाला प्रदर्शन का मोर्चा, खिलाड़ियों के साथ शहर की आबोहवा और पर्यावरण के लिए भी मैदान बचाने की उठी आवाज
नीमच। खेल मैदान बचाओ संघर्ष समिति का आंदोलन लगातार जारी है। शुक्रवार को जन्माष्टमी के पावन पर्व के बावजूद खिलाड़ियों और समिति सदस्यों का हौसला कम नहीं हुआ। दिनभर हुई भारी बारिश के बीच भी मैदान बचाने की मांग को लेकर खिलाड़ी और समर्थक धरना स्थल पर डटे रहे।
आज प्रदर्शन की जिम्मेदारी विमल शर्मा के नेतृत्व वाली टीम की रही। टीम के खिलाड़ी जेहरान, लोकेश सुथार, वसीम कुरैशी, दीपेश सिसोदिया, राजेश साहू, रोहित सालवी, दीपक मीणा, मोहसिन राज, सरवर खान, मोहसिन पठान, रमेश धाकड़, कृष्णा, मनीष शर्मा, नदीम खान और महेश किलोरिया सहित अन्य खिलाड़ी मौजूद रहे। वहीं संघर्ष समिति की ओर से कीर्ति पंचोली, नवीन अग्रवाल, मोहित रामरख्यानी सहित आमजन भी धरना स्थल पर उपस्थित रहे।
बारिश में भी नहीं डिगे कदम
जन्माष्टमी जैसे पर्व और लगातार हो रही तेज बारिश के बावजूद आंदोलनकारियों ने मैदान बचाने की मांग को लेकर अपना प्रदर्शन जारी रखा। बारिश ने भले ही परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनाई हों, लेकिन खिलाड़ियों और समर्थकों के कदम पीछे नहीं हटे। सभी ने एकजुट होकर स्पष्ट किया कि मैदान बचाने का संघर्ष किसी एक दिन या किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है।
मैदान सिर्फ खिलाड़ियों के लिए नहीं, शहर की सांसों के लिए भी जरूरी
संघर्ष समिति का कहना है कि यह खुला मैदान केवल खिलाड़ियों के अभ्यास और खेल गतिविधियों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि शहर की आबोहवा और पर्यावरण के लिहाज से भी इसकी अहम भूमिका है। शहर में खुले और हरित स्थान लगातार कम होते जा रहे हैं। ऐसे में यह मैदान आने वाली पीढ़ियों के लिए खुले स्थान, स्वच्छ वातावरण और बेहतर जीवनशैली का महत्वपूर्ण आधार है।
खुला मैदान शहर को खुली सांस लेने की जगह देता है। यहां होने वाली खेल गतिविधियों के साथ आसपास के वातावरण में खुलापन बना रहता है और यह स्थान शहर के पर्यावरणीय संतुलन में भी योगदान देता है। ऐसे खुले स्थानों को सुरक्षित रखना केवल खिलाड़ियों की जरूरत नहीं, बल्कि पूरे शहर के हित और भविष्य की पीढ़ियों की जिम्मेदारी है।
खिलाड़ियों और समिति सदस्यों का कहना है कि मैदान जमीन का महज एक टुकड़ा नहीं, बल्कि शहर की खेल प्रतिभाओं, युवाओं के भविष्य और स्वस्थ वातावरण से जुड़ा सार्वजनिक स्थान है। इसे बचाना इसलिए जरूरी है ताकि आने वाले वर्षों में भी युवा यहां खेल सकें और शहर को पर्याप्त खुले स्थान मिलते रहें।
जन्माष्टमी के दिन भारी बारिश के बीच भी मैदान बचाने के लिए डटे लोगों की मौजूदगी ने आंदोलन को एक अलग संदेश दिया—यह लड़ाई सिर्फ खेल मैदान की नहीं, बल्कि शहर के भविष्य, युवाओं के सपनों और बेहतर आबोहवा के लिए भी है।


